मुख्यमंत्री जी सच से कब तक भागेगी सरकार...?
राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर की योजना को सफल बनाने तथा अपने परिवार को अच्छी जिंदगी देने हम दो हमारे दो के नारा को साकार करने जैसे कई सरकारी पीठ थप थपाने वाले कार्य में अपनी जान गवांने वाली छत्तीसगढ़ की माताओं को न्याय मिलेगा या नहीं, यह तो समय बतायेगा। किन्तु कांग्रेस द्वारा निकाली गई महतारी न्याय यात्रा ने एक बात यह साफ कर दी वाकई कांग्रेस इस बार राजनीति नहीं बल्कि पीड़ितों के लिये न्याय व दोषियों पर कड़ी कार्यवाही के मांग के लिये ये प्रदर्षन व यात्रा हुए। फिर भी एक राजनैतिक पार्टी के द्वारा यह सब किया गया तो सवाल उठना तो लाजमी है कि ये अपनी राजनैतिक रोटियां सेक रहे हैं और आगामी निगम व पंचायत स्तर के चुनाव के लिये वोट बैंक पक्का करने का जुगत भिड़ा रहे हैं। किन्तु लोकतंत्र के लहजे़ से देखा जाये तो भले ही कुछ लोगों के लिये यह राजनीति हो किन्तु यह तो साफ है कि इस बार कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में मजबुत विपक्ष का परिचय दिया है। 10 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजनीति में साफ छवि व धिर गम्भीर माने जाने वाले मुख्यमंत्री के साफ छवि पर भी इस मामले के बाद कालिख तो लगे ही हैं। भले ही इसे लेकर भाजपा व सरकार कुछ भी कहे। किन्तु डाॅ. रमन सिंह का चेहरा व मिडिया को दिये गये उनके बयानों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस मामले ने सरकार को कहीं का भी नहीं छोड़ा है।
जिस साफ व धिर-गम्भीर छवि के दम पर लगातार तीसरी बार छत्तीसगढ़ की सत्ता पर रमन काबिज हुये हैं, उस जनता के विष्वास को बनाये रखने और अपने साफ व धिर गम्भीर छवि को जनता के बीच में कायम रखने मुख्यमंत्री को जवाब देना होगा या तो नैतिकता के नाम पर इस्तिफा देवें और जनता के बीच अपना विष्वास हासिल करें अथवा दोषि मंत्री को बचाना छोड़ राजधर्म का पालन करना होगा। अब तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चलती नहीं, नहीं तो बात साफ है अब के पीएम और तब के सीएम नरेन्द्र मोदी को राजधर्म का पालन सिखाने वाले वाजपेयी ने डाॅ. रमन को भी राजधर्म के पालन की नसीहत दी होती। डाॅ. रमन वास्तव में देखा जाये तो नसबंदी मामले के बाद लगातार सरकार भागती फिर रही है, कभी भी किसी ने मामले पर सही तरिके से बात करने की हिम्मत नहीं दिखाई है। सीएम बंगला घेरने के कांग्रेस की योजना ऐसा नहीं कि आपको मालुम नहीं होगी, राज्य की समस्या से बढ़कर पढ़ोसी राज्य के चुनाव में पार्टी को जीत दिलाना मेरे ख्याल से अपने राज्य से ज्यादा नहीं। इतने बड़े आंदोलन के बाद भी सरकार की ओर से किसी भी मंत्री अथवा जिम्मेदार अधिकारी का आंदोलनकारियों से बात करने नहीं आना क्या यह मान लिया जाये कि अपनी गलतीयों के कारण सरकार शर्म से लोगों के सामने आने से बच रही है कि आखिरकार जवाब क्या देंगे। इस बार तो दूसरे के ऊपर कुछ थोप भी नहीं सकते। क्या यह मान लिया जाये कि अतिसंवेदनषील सरकार को खुद ही संजीवनी की खोज है, जो इस बवंडर से बाहर निकाल सके।
- अंचल ओझा
राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर की योजना को सफल बनाने तथा अपने परिवार को अच्छी जिंदगी देने हम दो हमारे दो के नारा को साकार करने जैसे कई सरकारी पीठ थप थपाने वाले कार्य में अपनी जान गवांने वाली छत्तीसगढ़ की माताओं को न्याय मिलेगा या नहीं, यह तो समय बतायेगा। किन्तु कांग्रेस द्वारा निकाली गई महतारी न्याय यात्रा ने एक बात यह साफ कर दी वाकई कांग्रेस इस बार राजनीति नहीं बल्कि पीड़ितों के लिये न्याय व दोषियों पर कड़ी कार्यवाही के मांग के लिये ये प्रदर्षन व यात्रा हुए। फिर भी एक राजनैतिक पार्टी के द्वारा यह सब किया गया तो सवाल उठना तो लाजमी है कि ये अपनी राजनैतिक रोटियां सेक रहे हैं और आगामी निगम व पंचायत स्तर के चुनाव के लिये वोट बैंक पक्का करने का जुगत भिड़ा रहे हैं। किन्तु लोकतंत्र के लहजे़ से देखा जाये तो भले ही कुछ लोगों के लिये यह राजनीति हो किन्तु यह तो साफ है कि इस बार कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में मजबुत विपक्ष का परिचय दिया है। 10 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजनीति में साफ छवि व धिर गम्भीर माने जाने वाले मुख्यमंत्री के साफ छवि पर भी इस मामले के बाद कालिख तो लगे ही हैं। भले ही इसे लेकर भाजपा व सरकार कुछ भी कहे। किन्तु डाॅ. रमन सिंह का चेहरा व मिडिया को दिये गये उनके बयानों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस मामले ने सरकार को कहीं का भी नहीं छोड़ा है।
जिस साफ व धिर-गम्भीर छवि के दम पर लगातार तीसरी बार छत्तीसगढ़ की सत्ता पर रमन काबिज हुये हैं, उस जनता के विष्वास को बनाये रखने और अपने साफ व धिर गम्भीर छवि को जनता के बीच में कायम रखने मुख्यमंत्री को जवाब देना होगा या तो नैतिकता के नाम पर इस्तिफा देवें और जनता के बीच अपना विष्वास हासिल करें अथवा दोषि मंत्री को बचाना छोड़ राजधर्म का पालन करना होगा। अब तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चलती नहीं, नहीं तो बात साफ है अब के पीएम और तब के सीएम नरेन्द्र मोदी को राजधर्म का पालन सिखाने वाले वाजपेयी ने डाॅ. रमन को भी राजधर्म के पालन की नसीहत दी होती। डाॅ. रमन वास्तव में देखा जाये तो नसबंदी मामले के बाद लगातार सरकार भागती फिर रही है, कभी भी किसी ने मामले पर सही तरिके से बात करने की हिम्मत नहीं दिखाई है। सीएम बंगला घेरने के कांग्रेस की योजना ऐसा नहीं कि आपको मालुम नहीं होगी, राज्य की समस्या से बढ़कर पढ़ोसी राज्य के चुनाव में पार्टी को जीत दिलाना मेरे ख्याल से अपने राज्य से ज्यादा नहीं। इतने बड़े आंदोलन के बाद भी सरकार की ओर से किसी भी मंत्री अथवा जिम्मेदार अधिकारी का आंदोलनकारियों से बात करने नहीं आना क्या यह मान लिया जाये कि अपनी गलतीयों के कारण सरकार शर्म से लोगों के सामने आने से बच रही है कि आखिरकार जवाब क्या देंगे। इस बार तो दूसरे के ऊपर कुछ थोप भी नहीं सकते। क्या यह मान लिया जाये कि अतिसंवेदनषील सरकार को खुद ही संजीवनी की खोज है, जो इस बवंडर से बाहर निकाल सके।
- अंचल ओझा
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